श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने महामंडलेश्वर महेंद्रानंद गिरि महाराज को जगतगुरू व स्वामी कैलाशानंद को महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया। 

प्रयागराज। महामंडलेश्वर महेंद्रानंद गिरि महाराज को जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि जी महराज ने जगतगुरू की उपाधि से विभूषित किया गया। उन्हें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा सिद्ध बाबा मौज गिरि आश्रम में शनिवार को आयोजित समारोह में वैदिक परम्परानुसार गर्गाचार्य पीठ का जगतगुरू बनाया गया। साथ ही उनके शिष्य स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज को महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया गया। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु नरेंद्रानंद सरस्वती, श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज व श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर, श्रीपंच दशनाम जूना अखाडा अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने विधि-विधान के साथ महामंडलेश्वर महेंद्रानंद गिरि महाराज को गर्गाचार्य पीठ के जगतगुरू व स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज को महामंडलेश्वर के पद पर अलंकृत किया। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर के रूप में  महेंद्रानंद गिरि महाराज ने सनातन धर्म की जांे सेवा की और उसका परचम देश ही नहीं पूरे विश्व में फहराया, उसे देखते हुए ही उन्हें गर्गाचार्य पीठ की परम्परा के अनुसार पीठ का जगदगुरू बनाया गया है। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सनातन धर्म को मजबूत कर देश में रामराज्य स्थापित करने व भारत को पुनः विश्व गुरू बनाने के प्रयास में लगा है। इस कार्य के लिए महेंद्रानंद गिरि महाराज ने अपना पूरा जीवन ही सनातन धर्म को समर्पित कर रखा है। इसी के चलते उन्हें गर्गाचार्य पीठ का जगतगुरू बनाया गया है। श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर महेंद्रानंद गिरि महाराज के जगतगुरू बनने से सनातन धर्म का परचम पूरे विश्व में फहरेगा। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि जगतगुरू महेंद्रानंद गिरि महाराज ने सनातन धर्म के लिए जिस प्रकार अपना जीवन समर्पित कर दिया है, उससे लाखों-करोडों लोग प्रेरणा ले रहे हैं। उनके हजारों शिष्य हैं, जो सनातन धर्म को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। वे हिंदुओं को एकजुट करने के साथ जाति-पाति के भेदभाव को मिटाने का कार्य भी कर रहे हैं। यही कारण है कि वे शिष्य बनाते जाति नहीं देखते हैं, बल्कि अपने समाज, देश व हिदू धर्म के प्रति उनके समर्पण को देखते हैं। उनके गर्गाचार्य पीठ का जगतगुरू बनने से हिंदू धर्म एकजुट व मजबूत होगा। जगतगुरू महेंद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि उन्हें जगदगुरू के पद पर आसीन किया गया है, उसके लिए वे जगद्गुरु नरेंद्रानंद सरस्वती, श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज समेत सभी पदाधिकारियों व संतों का धन्यवाद करते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि उनका पूरा जीवन सनातन धर्म के लिए समर्पित रहेगा। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि संत धर्म व देश सेवा रूपी यज्ञ में अपने जीवन की आहुति देता है और जगतगुरू महेंद्रानंद गिरि महाराज ने तो अपना पूरा जीवन ही इस यज्ञ में आहुति देने के लिए समर्पित कर दिया है। जूना अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, श्रीमहंत निरंजन भारती महाराज, श्रीमहंत प्रेम भारती महाराज, चार मणि के अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती, निरंजन भारती, थानापति मुन्ना गिरि महाराज, वेणी माधव के महामंडलेश्वर वैभव गिरि महाराज आदि भी मौजूद रहे। सभी ने संगम स्नान किया और वेणु माधव का दर्शन-पूजन भी किया।

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